कीर्तन ओनकर
खिरकिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय खिरकिया के उप सेवा केंद्र के तत्वाधान में 8 मार्च दिन शनिवार को शहर के वार्ड नंबर 20 में महिला सशक्तिकरण दिवस मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी रेवा बहन ने महिला सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज महिला सशक्तिकरण की जरूरत क्यों पड़ी है। क्योंकि कमजोरी आ गई है।
कमजोरी आ गई शब्द उच्चारण ही क्यों किया गया उसी के लिए किया जाता है। जो पहले कभी शक्तिशाली था आज शक्ति गवा बैठा है। तो फिर से याद किया जाता है।उसके गौरवशाली बीते दिनों को जब हम शक्ति की बात करते हैं तो कौन सी शक्ति तो स्पष्ट है।केवल बाहरी शक्ति की बात नहीं है बाहर की शक्ति से पहाड़ उठाए जा सकते हैं। युद्ध जीते जा सकते हैं। लेकिन जब हम शक्ति की बात कर रहे हैं। तो यह चरित्र की शक्ति युद्ध नहीं जिता सकती, लेकिन विश्व परिवर्तन अवश्य कर सकती है।
नर्क को स्वर्ग अवश्य बना सकती है। घरों को स्वर्ग बना सकती है। और वह शक्ति में नारी सदा से आगे रही है। लेकिन अभी वर्तमान समय में माहौल के अनुसार नारी पर कई बातों का प्रभाव पड़ जाता है। किसी ने कहा कि तुम तो कमजोर हो, तुम अबला हो,तुम कोई काम की नहीं हो, तुम बच के रहो, पुरुषों से डर के रहो। तो यह असर भी आया और उस असर से बाहर निकलने के लिए नारी ने जोर लगाया खास भारतीय नारी, आज नारियां हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबरी पर हर कार्य कर रही है।
लेकिन पुरुषों के बराबरी करने के चक्कर में अपने स्वयं के अस्तित्व को भूल जाना यह सही नहीं है। जरूरी बात है नारी के अंदर नर जरूर समाया है।वह वाली शक्तियां जरूर है उन्हें, धारण जरूर करो लेकिन यह नहीं तुम कमाते हो हम भी कमाएंगे तुम पड़े हो हम भी पढ़ेंगे तो हम खाना नहीं बनाएंगे। अब तुम भी घर की सफाई करो तो हम भी करेंगे इस तरह की प्रतियोगिता सही नहीं है इसको सच्ची सफलता नहीं कहेंगे। वास्तव में गाड़ी के दो पहिए हैं तो दोनों को अपना-अपना काम करना है।
अगर कहीं विधि विधान समाज का बना था पुरुष कमाएगा ओर नारी घर संभालेगी तो एक बैलेंस था। जो कि गलत नहीं था कबीर दास । कबीर दास जी ने इसके ऊपर बहुत अच्छा कहा खुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है ।खुद ही को अर्थात की खुद के अंदर इंसान के अंदर एक इंसानी ताकत है उसको बुलंद कर दो उसको तेजोमय कर दो तो समाज अपने आप ही आपको रिस्पेक्ट देगा तो आंतरिक बल अपना बड़ा लेने की जरूरत है।सिर्फ अपने कर्तव्यों का त्याग कर देना यह कोई सफलता का मापदंड नहीं है।
इसकी बजाय अपना कर्तव्य भी पूरा करते यह सिद्ध करना कि हम आपके काम में भी मददगार बन सकते हैं। जिसके लिए मिसाल है। नारियों ने नर तारे एक बच्चे को पुरुष बना देने की ताकत नारी में है।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में राजयोग के माध्यम से जो आंतरिक शक्तियों को जागृत किया जा रहा है।वह वर्तमान समय में बहुत कामयाब हो रही है। राजयोग के द्वारा हमारी आंतरिक शक्तियों को जागृत करने से बाहरी समस्याओं से लड़ने की ताकत मिलती है।
आज जो इतना संकट आया है। नारी पर आज खास तौर पर नारी सुरक्षित नहीं खास तौर पर कहीं अकेले जा नहीं सकती छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार हो रहे। इसके लिए वर्तमान समय में शारीरिक बल के साथ-साथ आंतरिक मनोबल को बढ़ाने की भी बहुत-बहुत आवश्यकता है। हम आध्यात्मिक बल से हमारी आंतरिक शक्तियों को जागृत कर सकते हैं। जिससे हमारे अंदर सहनशक्ति भी बढ़ती है और समाज के जो भी दुष्प्रभाव है वह हमारे ऊपर नहीं पढ़ते और हम सदा सुरक्षा का अनुभव करते हैं।

