हरदा मंडी में गरजा किसान संघ: 2700 गेहूं और 2400 मक्का खरीदी की मांग को लेकर धरना

राजेन्द्र बिल्लौरे,हरदा।

​मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; चेतावनी- मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेश स्तर पर होगा आंदोलन

​हरदा के कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ पुरजोर आवाज बुलंद की और मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम अशोक डेरिया को ज्ञापन सौंपा।

किसानों का कहना है कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा।

​पसीने की कमाई का मांगा सही मोल-

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में मक्का ‘औने-पौने’ दामों पर खरीदी जा रही है, जिससे किसान कर्ज की मार झेल रहा है। संघ की मुख्य मांग है कि आगामी गेहूं खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल और मक्का की खरीदी 2400 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जाए। ज्ञापन में केवल फसलों के दाम ही नहीं, बल्कि सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।

​सिंचाई और खाद की व्यवस्था पर भी सवाल

किसान संघ ने मांग रखी कि ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए और ‘मोरंड-गंजाल संयुक्त सिंचाई परियोजना’ का कार्य शीघ्र प्रारंभ हो। इसके अलावा, तवा परियोजना से वंचित किसानों को शहीद इलाप सिंह परियोजना से जोड़ने और ई-टोकन व्यवस्था में को-ऑपरेटिव सोसायटियों को प्राथमिकता देने की मांग की गई, ताकि किसानों को 0% ब्याज का लाभ मिल सके।

​इन प्रमुख मांगों पर भी रहा जोर: रहटगांव, सिराली और हंडिया तहसील में खाद विक्रय केंद्र हेतु गोडाउन निर्माण।
​रबी सीजन में ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से प्रभावित फसलों की क्षतिपूर्ति व बीमा राशि का तत्काल भुगतान।
​कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

​भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष महेश शर्मा और जिला प्रवक्ता राजनारायण गौर ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज का प्रदर्शन केवल एक संकेत है। यदि शासन ने हमारी मांगों को अनदेखा किया, तो जिले से उठी यह आवाज पूरे प्रदेश में गूजेंगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

​इस अवसर पर मुख्य रूप से हरिशंकर सारण, रामकृष्ण मुकाती, विनोद पाटिल, आनंद राम किरार, विजय मलगाया, राजेंद्र बांके, श्याम पाटिल, ब्रज मोहन राठौर, दीपचंद नवाद, बालक दास छापरे, विष्णु गौर, बालकृष्ण मलगाया सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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