हरदा में कतिया समाज का हल्लाबोल; भाजपा जिला महामंत्री को शासकीय कॉलेज से हटाने की उग्र मांग

राजेन्द्र बिल्लौरे,हरदा।

मध्यप्रदेश के हरदा जिले के स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राजनीति और शिक्षा को लेकर विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को कतिया समाज विकास महासभा के बैनर तले सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को एक ज्ञापन सौंपा। समाज की मांग है कि कॉलेज में अतिथि विद्वान के रूप में कार्यरत भाजपा जिला महामंत्री बसंत सिंह राजपूत को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए।

​शिक्षा का मंदिर या राजनीति का अड्डा?

​ज्ञापन सौंपते समय कतिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष सोहन बिल्लौरे ने कड़े शब्दों में प्रशासन से सवाल किया कि कोई व्यक्ति एक साथ राजनीतिक दल के पदाधिकारी और शासकीय शिक्षण संस्थान में शिक्षक की भूमिका कैसे निभा सकता है? उन्होंने आरोप लगाया कि:
• बसंत सिंह राजपूत भाजपा के जिला महामंत्री जैसे रसूखदार पद पर हैं और खुलेआम पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होकर प्रचार-प्रसार करते हैं।
​• महाविद्यालय परिसर को शिक्षा के बजाय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है।
• ​अनुसूचित जाति वर्ग की महिला प्राचार्य को निशाना बनाया जा रहा है और कुछ छात्र संगठनों के जरिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

​’राजनीतिक संरक्षण’ पर उठाए सवाल-

​समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि पूर्व में भी बसंत सिंह राजपूत को महाविद्यालय से हटाया गया था, लेकिन राजनीतिक रसूख और ऊँची पहुँच के चलते नियमों को ताक पर रखकर उन्हें दोबारा पदस्थ कर दिया गया। संगठन ने सवाल उठाया कि ऐसा कौन सा नियम है जो किसी सक्रिय राजनीतिक पदाधिकारी को शासकीय महाविद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करने की अनुमति देता है?

​3 दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

​कतिया समाज विकास महासभा ने जिला प्रशासन को 3 दिन की मोहलत दी है। प्रदेश अध्यक्ष सोहन बिल्लौरे ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर उक्त अतिथि विद्वान को नहीं हटाया गया, तो सामाजिक संगठन सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

​शक्ति प्रदर्शन में ये रहे मौजूद-

​ज्ञापन देते समय प्रदेश अध्यक्ष सोहन बिल्लौरे के साथ देवेश्वर दूधे (एड.), तुकाराम बिलारे (एड.), विनोद नागले, रामस्वरूप लखोरे, राहुल पवारे, केपी चौरे, रामदयाल चोलकर, रामचन्द्र झिंझोरे, अर्जुन हुरमाले, देवीदिन चावड़ा, गणपत चौरसिया, जयनारायण चौरे, गंगाविशन ओनकर, गोलू भंवरे, लक्ष्मण भैंसारे, विनोद सांगुले, बंसीलाल चौरे, राम सरवर, बीपी चौरसिया, भुजराम चौरसिया, चैनसिंह भंवरे सहित सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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