हरदा: मछली बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से जारी अवैध कारोबार, मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हरदा। जिले में मछली पकड़ने और बेचने पर प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसके बावजूद यहां मछलियों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। यह सब मत्स्य विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत और लापरवाही के कारण हो रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नियमों की अनदेखी और नाममात्र की कार्रवाई-

​शासन द्वारा मछली प्रजनन काल को देखते हुए 16 जून से 15 अगस्त तक मछलियों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, इस प्रतिबंध का हरदा में कोई असर नहीं दिख रहा। जानकारी के अनुसार, पूरे जिले में विभाग ने अब तक सिर्फ इक्का-दुक्का कार्रवाई की है और मात्र साढ़े सात हजार रुपए की रसीद काटी है। यह राशि दर्शाती है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कितने उदासीन हैं।

​मत्स्य विभाग के निरीक्षक सुशील गौर पर भी आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कार्रवाई के दौरान मछली माफियाओं पर 100-100 रुपए की मामूली रसीदें काटकर उन्हें संरक्षण दिया है।

अवैध परिवहन और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी-

हरदा ​शहर के बीचों-बीच मछलियों की बिक्री जारी है, लेकिन विभाग के कर्मचारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसा लगता है मानो वे कुंभकरण की नींद सो रहे हों, जबकि अवैध मछली बिक्री व परिवहन का कारोबार खुलेआम चल रहा है।

इधर,​जब इस मामले पर मीडिया ने विभाग के निरीक्षक सुशील गौर से बात करने की कोशिश की, तो वे कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए। उनके इस व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता है। विभाग की यह उदासीनता न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जलीय जीवन के संरक्षण के प्रयासों को भी कमजोर कर रही है।

मत्स्य विभाग के अधिकारी संदीप वर्मा का कहना है कि हमने 16 जून से अब तक 21 मामलों में 7 हजार 600 रुपए की कार्रवाई की है। वही,शहर में मछली बिक्री को लेकर वर्मा ने कहा कि स्टाफ की कमी है इसलिए कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।पैसे लेकर मछली की गाड़ी की बात को लेकर उनका कहना है कि अगर ऐसा पाया जाता है तो हम जांच कर कार्रवाई करेंगे।

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